By heygobind Date August 11, 2019

एक कंजूस सेठ था। वह अपना जीवन बहुत ही कंजुसी से जिया करता था। जितनी आवश्यकता होती है उससे भी कम वो खर्चा किया करता था। एक दिन उसके मन में आया कि पूजा पाठ करना चाहिए। पर उसको फिर विचार आया कि यदि वो पूजा पाठ करेगा तो उसके लिए भी खर्चा करना होगा। फिर उसने सोचा क्यों न पूजा पाठ मानसिक रूप से कर लिया जाय जिसमें कोई खर्चा नह...

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By heygobind Date January 30, 2019

एक बार मथुरा के निकट एक गाँव में एक छोटी लड़की रहती थी। वृन्दावन के निकट होने के कारण वहां से बहुत लोग ठाकुर जी के दर्शन को जाते थे। जब वो छोटी बच्ची 5 साल की हुई तो उसके घर वाले बांके बिहारी जी के दर्शन के लिए जा रहे थे। उस समय वाहन बहुत कम थे। उनको दर्शन को जाते देख उस छोटी लड़की ने कहा "पिताजी मुझे भी अपने साथ ठाकुर जी के दर्शन के लिए ले चलो" प...

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By heygobind Date January 30, 2019

एक गोपी यमुनातट पर बैठकर प्राणायाम और ध्यान कर रही थी। वहाँ पर नारदजी वीणा को बजाते हुए आये तो नारदजी बड़े ही ध्यान से देखने लगे की गोपी कर क्या रही है? क्योंकि उनको समझ नहीं आया की वज्र में भी कोई प्राणायाम और ध्यान कर सकता है, काफी देर देखने से भी उनको समझ नहीं आया। वे गोपी के पास गए और पूछा " देवी आप ये क्या कर रहे हो ? मुझको समझ नहीं आ रहा ...

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By heygobind Date January 30, 2019

एक समय कान्हा गौशाला में खेल रहे थे। गौशाला में एक गोपी गोबर के तसले भरकर बार-बार ले जा रही थी, गोबर के उपले बनते है और फिर उन्हीं पर फिर रसोई बनती है। गोपी कान्हा से बोली " कन्हैया ! नेक मेरो यो तसला तो सिर पर रखवाय दे। कान्हा "अरी ओ गोपी! मै काय धरवाऊ, तू आपसे रख ले ना। एकतो मेरी शिकायत मोरी मैईया से करती है और अब काम भी करवाती है। गोपी बोल...

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By heygobind Date January 28, 2019

बाबा फरीद एक सूफी संत थे, एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और कहा की मुझ में बहुत से बुरी आदत है उनको मैं कैसे छोड़ू ? बाबा फरीद ने उनकी बात सुनी और उनको कोई उत्तर नहीं दिया और उठकर खड़े हो गए और उनके कुछ दूर ही एक खम्बा था वो उसके पास जा कर जोर जोर से पुकारने लगे मुझे छुड़ाओ छुड़ाओ बचाओ बचाओ। जो आदमी उनके पास आया था वो हैरान हो गया। वो सोचने लगा...

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By heygobind Date January 28, 2019

राम सीता और लक्ष्मण वन से जा रहे थे। वन का मार्ग संकरा था केवल एक ही ही मनुष्य चलने लायक छोड़ था। धनुषवान हाथ में लेकर श्रीरामजी सब से आगे चल रहे थे, उनके पीछे लक्ष्मणजी धनुषवान् लेकर जा रहे थे। लक्ष्मणजी की श्रीरामजी में अत्यंत भक्ति और प्रीति थी। वे चाहते थे की उन्हें श्रीरामजी का दर्शन हर पल हो। पर वे क्या करे? उनके और श्रीरामजी के बीच में सीत...

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By heygobind Date January 28, 2019

दक्षिणशेवर में एक दिन श्रीरामकृष्ण अपने एक सरल परंतु वादप्रिय स्वभाव वाले शिष्य को कोई बात समझा रहे थे पर उसकी विचार शक्ति में वो बात नहीं आ रही थी और वो विवाद कर रहा था। श्रीरामकृष्ण के तीन चार बार समझाने पर भी जब उसका तर्क और वाद विवाद बंद नहीं हुआ, तब कुछ क्रुद्ध होकर परंतु मीठे शब्द में बोले "तू कैसा व्यक्ति है रे ? मै जब स्वयं कहता हूँ तो भ...

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By heygobind Date January 28, 2019

तुलसीदास जी एक बार रात्रि को आ रहे तभी उनको कुछ चोर मिल गए।  तुलसीदास जी को देखकर चोरों ने उनसे पुछा " आप कौन हो ओर इतनी रात को क्या कर रहे हो ? तुलसीदास जी  ने कहा "मेरे भाई जो तुम हो वो ही मै  हूँ। उन सब चोरों ने उनको भी अपना जैसा मान लिया की ये भी चोर हैं।  चलो सही हैं अब हम सब मिलकर चोरी करते हैं...

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By heygobind Date January 28, 2019

श्री कर्मानंद जी चारण कुल में उत्पन्न एक श्रेष्ठ भक्त थे,वे अपने मधुर गायन से प्रभु की सेवा करते थे।आपका गायन इतना भाव पूर्ण होता था कि उसे सुनकर पाषाण ह्रदय भी पिघल जाता था।आप गृहस्थ  भक्त थे,परन्तु गृहस्थी उन्हें अधिक दिनों तक रास नहीं आयी और एक दिन वो सव कुछ छोड़ कर तीर्थो में भ्रमण के लिए निकल पड़े।साधन साम...

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By heygobind Date January 28, 2019

श्री दमा बाई जी अत्यंत उच्च कोटि की संत थी।आपकी संत सेवा में बड़ी ही रुचि थी।संतो के मुख से भगबद गुणानु बाद सुनते सुनते आपके मन में अभिलाषा हुई कि प्रभु कृपा करके दर्शन दे,अपनी मनमोहनी झांकी दिखा कर मुझे कृतार्थ करे।इनकी निरंतर अभिलाषा को देखकर प्रभु ने कईबार संत वेश में इन्हें दर्शन भी दिया पर ये भगवान् को पहचान नह...

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माघ कृष्ण चतुर्थी –  संकष्टी चतुर्थी – संकट  चौथ

माघ कृष्ण चतुर्थी – संकष्टी चतुर्थी – संकट चौथ

हनुमानजी के 12 नाम, जिनके द्वारा हनुमान जी की  स्तुति की जाती है।

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पांच प्रेत…पृथु एक भक्त ब्राम्हण था। वह रोज हरिभक्ति में तल्लीन रहता था। वह प्रभुजी को बहुत प्रेम करता था

पांच प्रेत…पृथु एक भक्त ब्राम्हण था। वह रोज हरिभक्ति में तल्लीन रहता था। वह प्रभुजी को बहुत प्रेम करता था

प्रभुजी रिश्ता | कई संत भगवान को अपना शिष्य, गुरु आदि मानते थे। एक संत वे प्रभु श्री राम को बहुत मानते थे

प्रभुजी रिश्ता | कई संत भगवान को अपना शिष्य, गुरु आदि मानते थे। एक संत वे प्रभु श्री राम को बहुत मानते थे

श्रीकृष्णनाम और पारस पत्थर……..

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उत्तम स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण बातें, हर रोज सुबह बच्चो को प्यार से जगाना चाहिए

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श्री कृष्ण और राधारानी जी के पहली बार के मिलन

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ब्रजदर्शन (काम्यवन धाम):- प्रेम की भाषा ब्रजदर्शन (काम्यवन धाम):- प्रेम की कोई भाषा नही होती ना प्रेम का कोई सीमित दायरा

ब्रजदर्शन (काम्यवन धाम):- प्रेम की भाषा ब्रजदर्शन (काम्यवन धाम):- प्रेम की कोई भाषा नही होती ना प्रेम का कोई सीमित दायरा

सावधानी

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Hindu Panchang

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