By heygobind Date September 12, 2021

एक विचारशील व्यक्ति को श्राद्ध (Shradh) के दिन से एक दिन पहले आत्मसंयमी, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को आमंत्रित करना चाहिए। लेकिन यदि श्राद्ध के दिन बिन बुलाए तपस्वी ब्राह्मण घर में आ जाए तो उसे भी भोजन करना चाहिए। श्राद्ध करने वाले को घर आए ब्राह्मणों के पैर धोने चाहिए। फिर उन्हें हाथ धोकर आचमन करना चाहिए। इसके बाद उन्हें आसन पर बिठाकर भोजन कराना चाहिए...

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By heygobind Date October 7, 2020

भगवन्नाम की महिमा लिए के लिए महर्षि वेदव्यासजी अपने कहते हैं- कलिर्धन्यः ʹअर्थात् कलियुग धन्य है !ʹ शिष्यों ने व्यासजी जी से पूछा कि “गुरुजी ! कलियुग में तो दुराचार, निंदा, राग-देष, पाप अधिक हैं फिर आप कलयुग को धन्य क्यों कह रहे हों !” व्यासजी ने बोले “कलियुग को धन्य इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि इसमें श्री हरि को प्राप्त करना अधिक आसान है। ...

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By heygobind Date April 6, 2020

शास्त्रों में हनुमानजी के 12 नाम दिए गए हैं, जिनके द्वारा हनुमान जी की स्तुति की जाती है। हनुमानजी के 12 नामों का जो रात में सोने से पहले व सुबह उठने पर अथवा यात्रा शुरू करने से पर पाठ करता है, उसके सभी भय दूर हो जाते हैं और उसे अपने जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं। वह अपने जीवन में सभी प्रकार की उपलब्धियां प्राप्त करता है। हनुमानजी की 12 नाम...

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By heygobind Date January 30, 2019

श्री बाँके बिहारीजी के मन्दिर में केवल शरद-पूर्णिमा के दिन ही श्री श्रीबाँके बिहारीजी वंशी धारण करते हैं। केवल श्रावण तीज के दिवस ठाकुरजी को झूले पर बैठते हैं एवं जन्माष्टमी के दिन उनकी मंगला–आरती होती हैं। जिसके दर्शन बड़े ही सौभाग्यशाली व्यक्तियों को ही प्राप्त होते हैं। और चरण-दर्शन केवल अक्षय तृतीया के दिवस ही होता हैं। चरण-कमलों का जो दर्शन ...

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By heygobind Date January 28, 2019

ब्रजदर्शन (काम्यवन धाम):- प्रेम की कोई भाषा नही होती ना प्रेम का कोई सीमित दायरा होता है.. ऐसे ही इस ब्रजधाम में रस का कोई अन्त ही नही, यह तो हमारी पात्रता पर निर्भर है की हम इसको कितना पा सकते हैं। हमारे युगल सरकारजी की प्रेमभरी लीला में सभी रस आपको मिल जायेंगे इन्ही रसो के दिव्याति दिव्य दर्शन है हमारे ब्रजधाम में। इस रस को बहुत से संतो ने अपन...

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By heygobind Date January 28, 2019

उस प्रभु को क्या कहे, घनश्याम मनमोहन सवाँरे की प्रेम की कैसी कैसी अद्भुत रहस्यमयी लीला कथाएं। शरद की रात्रि को श्री यमुना पुलिन पर वंशीवादन के त्रैलोक्य मोहिनी स्वरों से गोपियों को उनका चिरप्रतीक्षित अभीप्सित वर देने के लिये स्वयंही बुला रहे है और जब वे पगली बावरी, बेसुधसी दौड़ी आती हैं तो घनश्याम उनको कहते है कि यहाँ क्यों आयी हो ? अच्छे भले घ...

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By heygobind Date January 28, 2019

मनुष्य जीवन के समय को अमूल्य समझकर उत्तम से-उत्तम कार्य में व्यतीत करना चाहिए। एक पल भी व्यर्थ नहीं बिताना चाहिये। यदि किसी कारण से कभी कोई पल भगवत चिंतनके बिना बीत जाय तो उस पल के लिए पुत्र शोक से भी बढ़कर घोर पश्चाताप करना चाहिये पुरे मन से, जिससे फिर कभी ऐसी भूल न हो पाय। जिसका समय व्यर्थ हो जाता है, उसने शायद समय का मूल्य समझा ही नहीं। मन...

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By heygobind Date January 28, 2019

कई संत भगवान को अपना शिष्य, गुरु आदि मानते थे। एक संत वे प्रभु श्री राम को बहुत मानते थे और कहते है यदि भगवान के निकट आना है तो उनसे कोई न कोई रिश्ता जोड़ लो। आपको जिधर भी जीवन में कमी लगती है उधर प्रभु जी के साथ सम्बन्ध बना लो। प्रभु जी उस रिश्ते को निभाते हैं। इस तरह एक संत भी हमारे प्रभु श्री राम जी को अपना शिष्यरूप में देखते थे और जो शिष्य ह...

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By heygobind Date January 28, 2019

एक परिवार में सास और बहु थे। जो सास थी वो रोज ठाकुरजी की पूजा करती थी बड़े ही नियम और ध्यान से। शरद ऋतू में एक बार सासु माँ को किसी कार्य के कारण घर से बाहर जाना पड़ा। माता जी ने सोचा अब मैं कुछ दिन घर से बाहर जा रही हूँ और ठाकुर जी को साथ भी नहीं ले जा सकती, अब में ये सेवा कुछ दिन के लिए अपनी बहु को दे देती हूँ। लेकिन मेरी बहु को कुछ अक्कल भी नही...

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By heygobind Date January 28, 2019

कोई हमारे घर पर आता है तो हम उसके लिए अच्छे पकवान दाल चावल पूरी हलवा आदि सब कुछ तो दे सकते है पर उसको हम भूख नहीं दे सकते। भूख तो उसको स्वयं की होनी चाहिए। उसी प्रकार प्रभु प्राप्ति की उत्कट अभिलाषा स्वयं की होनी चाहिए। उत्कट अभिलाषा होने पर भगवत्प्राप्ति में देरी का कारण ही नही है। आप ईश्वर को पाने को तैयार हो और ईश्वर आपको अपनाने को, फिर इसमे...

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कढ़ी पत्ता जैसे की नाम से ही पता चलता हैं की ये कढ़ी में डाला जाता हैं इसलिए इसका नाम कढ़ी पत्ता रखा गया हैं।

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एसिडिटी क्यों होता हैं। एसिडिटी को खत्म करने का घरेलू इलाज

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अक्षय तृतीया …….अक्षय तृतीया सतयुग और त्रेतायुग की आरम्भ की तिथि मानी जाती हैं।

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Vat Savitri 2020 वटसावित्री-व्रत (वटसावित्री व्रत – अमावस्यांत पक्ष : 20 मई

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कामदा एकादशी | Kamada Ekadashi

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गर्भवती महिलायें ग्रहण के प्रभाव से बचने हेतु रखें इन बातों का ध्यान

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गर्मियों में जौ और चने का सत्तू बहुत ही लाभदायी होता है।

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बाबा फरीद एक सूफी संत थे | बाबा फरीद एक सूफी संत थे, एक बार एक व्यक्ति उनके पास आया और कहा की मुझ में बहुत से बुरी आदत है

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श्राद्ध का महत्व और नियम  13 सितम्बर से 28 सितम्बर तक, श्राद्ध में नियम, जिससे पितृ प्रसन्न होते हैं।

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माघ कृष्ण चतुर्थी –  संकष्टी चतुर्थी – संकट  चौथ

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